खेती बाड़ी

सावधान : आम की फसल पर लगने वाले कीट एवं रोगों का तुरंत करें उपचार, वरना हो सकता है घाटा !

पिछले कुछ सालों से आम के फसल में किसानों को लगातार घाटा हो रहा है। जिससे उन्हें इन फलों के उचित दाम नहीं मिल पा रहा था। लेकिन अगर वे इस बार भी सचेत नहीं हुए तो इस बार भी उनको घाटा हो सकता है। आपको बता दे कि भारत में होने वाले अधिकतर आमों पर विदेश ने भी प्रतिबंध लगा दिये है। जिससे आप अपने आमों को विदेश भी नहीं भेज सकते। आमों का विदेश भेजने पर रोक लगाने का प्रमुख कारण अधिक रासायनिक खाद्य या कीटनाशकों का इस्तेमाल करना है। आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिससे आपके घाटे का यह व्यापार आपके लिए मुनाफादायक साबित हो सकता है। अगर आप समय रहते इन उपचारों को तुरंत अमल में नहीं लाएंगे तो आपका यह व्यापार आपके लिए घाटे का साबित हो सकता है...

कीट एवं उपचार

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जाला कीट/टेन्ट केटरपिलर कीट (Leaf webber) : शुरूआती अवस्था में यह कीट पत्ती की उपरी सतह को तेजी से खाता है, उसके बाद पत्तियों का जाल या टेन्ट बनाकर उसके अन्दर छिपकर पत्तियों को खाता रहता है।

रोकथामः एज़ाडीरेक्टिन 3000 पीपीएम का दो मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। बीटी. जैव-कीटनाशक का एक किलो प्रति छिड़काव करें। चौदह पर्णी वनस्पति कीटनाशक का एक लीटर घोल को 20 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
गुठली का घुन कीट (Stone Weevil)  : यह कीट आम की गुठली में छेद कर के आम में घुस जाता है और फल को नुकसान पहुंचाने लगता है। जिससे फल खराब हो जाता है। कुछ देशों ने इस कीट से ग्रसित आमों को अपने यहां भेजने पर पूर्णरूप से रोक लगा दिया है।
रोकथामः  इस कीट को रोकना मुश्किल होता है, इसलिए जो भी फल पेड़ से गिरे उसे और पेड़ की सूखी पत्तियों और शाखाओं को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। इससे कुछ हद तक हम इस कीट को फैलने से रोक सकते है।

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फुदका/भुनगा/हॉपर कीट (Mango Hopper) :  यह कीट आम की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। यह कीट कोमल पत्तियों और मंजरों का रस चूसकर हानि पहुचाते हैं। 
रोकथाम : बिवेरिया बेसिआना/मेटारीजियम फफूंद का 0-5 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। नीम तेल 3000 पीपीएम दो मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कार्बोरिल 0.2 प्रतिशत या क़ुइनोल्फोस 0.063 प्रतिशत या डाईमेथेओएट 0.06 प्रतिशत या मिथाइल ओडेमिटान 0.05 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। परभक्षी कीट जैसे मेलाडा बोनेंसिस और क्राईसोपा मित्र कीट का संरक्षण करें। चौदह पर्णी वनस्पति कीटनाशक का एक लीटर घोल को 20 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
 

दीमक कीट(Termite):  यह कीट जड़ों को खाकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं, उसके बाद सुरंग बनाकर उस पेड़ पर चढ़ने लगते हैं। यह तने के ऊपर मिट्टी का जमाव करके अपने आप को सुरक्षित करता है।

रोकथाम: तने के ऊपर मिट्टी की परत को हटा देना चाहिए। 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में बिवेरिया बेसिआना का घोल बनाकर 10 दिन के अन्तराल पर तीन बार छिड़काव करना चाहिए। तने के ऊपर 1.5 प्रतिशत मेलाथियान का छिड़काव करना चाहिए। दो महीने बाद पेड़ के तने को मोनोक्रोटोफोस (एक मिली प्रति लीटर) से मिट्टी को पर छिड़काव करें।
गाल मिजमक्खी कीट (Gall Midge fly) : यह कीट आम के डंठल पत्तियों, फूलों और छोटे-छोटे फलों के अन्दर रह कर हानि पहुचाता हैं। इनके प्रभाव से मंजर और फल नहीं लगते हैं। फल गिरने लगते है।  इनके लार्वा सफेद रंग के होते हैं, जो बढ़ने पर भूमि में प्यूपा/कोसा/शंख में बदल जाते हैं।

रोकथाम: इसके लार्वा मिट्टी में ही प्युपेट होते है, इनके रोकथाम के लिए गर्मियों में गहरी जुताई करें।  साथ ही में जुताई के बाद मिट्टी में मिथाइल पाराथियान 25-30 किग्रा प्रति हेक्टेयर मिलाएं ताकि लार्वा नष्ट हो जाए। रासायनिक कीटनाशक डाइमथेओएट 30 ई.सी. (0.6 मिली/लीटर) या थायोक्जम 25 (0.4 मिली./लीटर) या मिथाइल डेमेटोन 25 ई.सी. 2मिली./लीटर पानी घोल का छिड़काव मंजर आने (Bud brust stage) की स्थिति में करना चाहिए। 

 

फल मक्खी/डासी मक्खी (Fruit fly) :  फल मक्खी आम के फल का खतरनाक कीट है और इसी कीट के कारण आम के निर्यात की समस्या आती है। इस कीट की सुड़ियां आम के अन्दर घुसकर गूदे को खाती हैं, जिससे फल ख़राब हो जाता है।
रोकथाम: फ्रूट फ्लाई ट्रैप का घोल 60 मिली एथेनाल, 40 मिली मिथाइलयुजिनाल और 20 मिली मेलाथियान का ल्यूर बनाकर डिब्बे/बोतलों में फिट कर पेड़ों पर लटका देने से नर मक्खियां आकर्षित होकर मेलाथियान द्वारा नष्ट हो जाती हैं। एक हक्टेयर बाग में 10 डिब्बे लटकाना चाहिए।
गुजिया (Mealy bug): यह कीट मंजर एवं फलो के गुद्दा या सन्न से रस चूसता है| इसके प्रभाव से मंजर सूख जाते है औऱ फल भी सूख कर झड़ जाते है। यह कीट फलों पर चिपचिपा पदार्थ पर भी छोड़ देती है , जिससे फलों पर काले फफूंद उग आते है।

रोकथाम : गुजिया को पेड़ पर चढ़ने से रोकने के लिए दिसंबर के अंतिम सप्ताह में तने के चारों ओर 25 सेमी चौड़ी 400 गेज पोलीथीन की पट्टी धरती से 1.3-2.0 फीट की ऊंचाई पर सुतली या धागे से बांध देनी चाहिए और निचले सिरे पर ग्रीस लगा देनी चाहिए। अन्डों से निकले गुजिया की रोकथाम के लिए मेलाथियान 5 प्रतिशत रसायन की 250 ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से तने के चारों ओर छिड़काव कर खुरपी से मिट्टी में मिलाना चाहिए। 
 

स्केल कीट (Scale insect) : यह कीट सफ़ेद रंग के होते हैं और पत्तियों, तना और फल आदि पर रहकर रस चूसते रहते हैं। जिसकी वजह से पत्तियों का रंग काला पड़ जाता है और फल के स्वाद फीके या बेस्वादी हो जाते है। यह फल को बढ़ने से भी रोकता है।
रोकथाम: ग्रसित शाखाओ को नष्ट कर दे जब जरुरत हो तभी सिंचाई करें। यदि कीट का प्रकोप दिखने पर पांच प्रतिशत सर्फ़ का घोल बनाकर या 2 प्रतिशत मैदा का घोल बनाकर तीन से चार बार छिड़काव सात दिन के अन्तराल पर करें। मैलाथियान 50 प्रतिशत इ सी 2.25 -3.0 किग्रा को 1500 से 2000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 
शाखा छेदक कीट (Shoot borer) : यह कीट पौधों के नई शाखाओं में छेद करते हैं, जिसकी वजह से पत्तियां झड़ने व शाखाएं सूखने लगती हैं। 
रोकथाम : इस कीट से ग्रसित भाग एवं टहनियों को काटकर नष्ट कर दें। ज्यादा प्रकोप बढ़ने पर रासायनिक कीटनाशक जैसे कार्बारील (0.2%) या क्यूनालफास (0.5%) का 15 दिन के अन्तराल पर 2-3 छिड़काव करें। 


थ्रिप्स/रुजी कीट (Thrips) :  यह कीट गहरे भूरे रंग का होता है। यह कीट पेड़ के पत्तियों और फलों से रस चूसते हैं और काला गाढ़ा भूरे रंग के मल छोड़ते हैं, जिससे कि पत्तियों और फलों की सतह पर दाग पड़ जाते हैं। 
रोकथाम: नीम आधारित कीटनाशक जैसे नीम तेल या एज़डीरेक्तिन 1500 पीपीएम 2 मिली/लीटर पानी में घोलकर सात दिन के अन्तराल पर दो बार छिड़कना चाहिए। जैव-कीटनाशक जैसे मेटारिजियम एनिसोपिलिया 10 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर सात दिन के अन्तराल पर दो बार छिड़काव करें। 
छाल खाने वाला कीट (Bark Eating Caterpillar)  : इस कीट का प्रकोप ज्यादातर पुराने बाग़ जहां धूप नही पहुंचती, वहां ज्यादा होता है। इस कीट के लार्वा/सुंडी छाल को खाकर पेड़ कमजोर कर देते है। इसके लार्वा सामान्यतः अप्रैल से दिसंबर के माह में आम में छाल को खाकर नुकसान पहुंचाते है। 
रोकथाम: इस कीट की रोकथाम के लिए इसके द्वारा बनाएं गए छेदों को किसी पतले तार से साफ़ कर रुई के साथ पेट्रोल/डीजल/केरोसिन तेल से भिगोकर, निचोड़कर या उनमें एक प्रतिशत घोल वाले 0.05 प्रतिशत मोनोक्रोटोफोस/डीडीवीपी (0.05%) को रुई में भिगोकर या छेद को साइकिल के स्कोप से घुसेड़कर बंद कर देना चाहिए, और उसके ऊपर पीली मिट्टी का लेप लगा दें। इसके बाद सूखे शाखाओं को पेड़ से अलग कर दें।

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