मुर्गी पालन
मुर्गियों को बर्ड फ्लू से कैसे बचाएं

मुर्गी पालन में हम साल में कम से कम एक बार बर्ड फ्लू का नाम तो सुनते ही है। इस बीमारी का असर न सिर्फ मुर्गियों पर होता है, बल्कि बीमार मुर्गी को खाने वाले इनसान और जानवर पर भी होता है। बर्ड फ्लू के कारण मुर्गियां मरना शुरू हो जाती हैं और कई बार तो पूरी की पूरी खेप ही खत्म हो जाती है। ये बीमारी मुर्गियों में निम्न कारणों से फैलती है
- बीमार पक्षी से दूसरे पक्षी को
- बीमार पक्षी के मल-मूत्र से
- गंदा पानी पीने से
- मुर्गी घर में साफ-सफाई न होने से, आदि

बर्ड फ्लू के लक्षण
- बीमार मुर्गी सुस्त हो जाती है
- मुर्गियां अचानक मरने लगती हैं
- गर्दन और सिर के आस पास सूजन दिखाई देती है
- खून भी बहने लगता है
- पंखों, कलगी और तांगों का रंग बदल जाता है
- अंडे देना कम हो जाता है
- पंख झड़ने लगते हैं

बर्ड फ्लू से बचाव के तरीके
- मुर्गियों को मुर्गी घर में बंद रखें
- गैरजरूरी लोगों को मुर्गी घर में न जाने दें
- मुर्गी घर में जाने से पहले साफ सफाई का ध्यान रखें
- मुर्गे-मुर्गियों के पास दूसरे पक्षियों या जानवरों को न आने दें
- मुर्गी घर में साफ सफाई रखें
- मुर्गी घर के आस पास भी सफाई का ध्यान रखें
- खराब, सड़ा और बदबूदार खाना न दें
- रोजाना पीने के लिए साफ पानी दें
- मुर्गे-मुर्गियों को साफ खाना खाने के लिए दें
- मुर्गी घर को संक्रमण मुक्त रखें
- चूजों को दूसरे मुर्गे-मुर्गियों से दूर रखें
- उपकरणों की सफाई का विशेष ध्यान रखें
- बीमार मुर्गे-मुर्गियों को स्वस्थ मुर्गे-मुर्गियों से दूर रखें
- मर चुके मुर्गे-मुर्गियों दो मुर्गी घर से दूर जला दें या जमीन में गहरा गढ्ढा खोद कर गाड़ दें
सारी सावधानियां बरतने के बाद भी अगर बर्ड फ्लू के लक्षण दिखाई दें, तो बिना समय गवाए नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।
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