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मवेशियों को हो सकता है त्वचा रोग

नजरअंदाज करना हो सकता है नुकसानदायक

बदलते मौसम में मवेशियों को कई कारणों से त्वचा संबंधी रोग हो सकता है। ऐसे में अगर पशुपालक उसे नजरअंदाज करें तो हो सकता है आगे चल कर यह उनके लिए नुकसानदायक सिद्ध हो। हलांकि त्वचा के रोगों के लक्षण आमतौर पर साफ नहीं दिखाई देते हैं, इस लिए मवेशियों को त्वचा रोगों से बचाने के लिए नीचे बताए गए बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जीवाणु जनित रोग
लक्षण

  1. संक्रमित जगह गर्म हो जाती है
  2. संक्रमित जगह लाल दिखाई देती है
  3. संक्रमण ज्यादा फैलने से वहां से मवाद निकलने लगता है

इलाज

  1. संक्रमित जगह को एंटीबायोटिक शैम्पू से धोना चाहिए
  2. संक्रमित जगह को साफ करने पर बाद वहां पर एंटीबायोटिक क्रीम लगाना चाहिए
  3. मवेशी को पशु चिकित्सक से दिखाना चाहिए और सलाह पर ऑपरेशन कराना चाहिए

कृमि से होने वाला रोग
लक्षण

  1. यह रोग ज्यादातर मवेशी के कान में होता है
  2. संक्रमण के कारण कान में खुजली होती है
  3. खुजली के कारण वहां के बाल झड़ जाते हैं
  4. संक्रमण के कारण कान में भूरे काले रंग की गंदगी (वैक्स) जमा हो जाती है

इलाज

  1. हल्के गर्म पानी और एंटीबायोटिक शैम्पू से मवेशी का कान धोना चाहिए
  2. चिकित्सक के परामार्श के आधार पर ओलिनाल और प्रेडनीसोलॉन दवा का इस्तेमाल करना चाहिए

फफूंद जनित रोग
लक्षण

  1. इससे मवेशी के बाल, त्वचा और नाखून प्रभावित होते हैं
  2. इससे प्रभावित शरीर के नम जगह जैसे खुर, नाखून, जननांग आदि हिस्से होते हैं

इलाज

  1. प्रभावित जगह के सबसे पहले बाल काट दें
  2. चिकित्सक के परामार्श के आधार पर ग्रीसियोफुल्विन दवा 5 से 20 मिलीग्राम प्रति किलो शरीर की दर से रोजाना एक महीने तक खिलाएं
  3. माइकोनाजोल या ऐम्फोटेरिसिन-बी मरहम भी प्रभावित हिस्से पर लगाना चाहिए

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