खेती बाड़ी

धान की फसल में कीट प्रबंधन

खेत में नमी की कमी या कम बारिश होने का बुरा असर धान की फसल पर पड़ता है। इससे फसल में दीमक और दूसरे कीट लगने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन किसान अगर कुछ बातों का ध्यान रखें तो इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। 

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दीमक लगने पर- अगर खेत में दीमक दिखाई दें तो समझ लें कि आपके खेत में नमी की कमी हो गई है। सबसे पहले फसल की अच्छी तरीके से सिंचाई कर लें, ताकि नमी बनी रहे। इससे शुरूआती अवस्था में कामयाबी मिलने की संभावना रहती है। अगर सिंचाई के बाद भी दीमक दिखाई दें तो 5 लीटर क्लोरोपायरीफॉस 20 ई.सी. प्रति हेक्टेयर की दर से बालू में मिलाकर कर छिड़काव करें। 

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तना छेदक- अगर धान की फसल में तना छेदक कीट दिखाई दे तो फौरन प्रभावित पौधों को जड़ से उखाड़ कर दूर जला कर नष्ट कर दें। इस पर नियंत्रण पाने के लिए हर 20-25 मीटर पर पौधों से 50 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर फेरोमोन ट्रैप लगाएं। एक हेक्टेयर खेत में 20 ट्रैप लगाए जा सकते हैं। फिर जैसे जैसे फसल की ऊंचाई बढ़ती जाए, उसी के मुताबिक ट्रैप की भी ऊंचाई बढ़ानी चाहिए। साथ ही धान की फसल की शुरुआती अवस्था में कीटों की रोकथाम के लिए 19 किलो कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी या फिप्रोनिल 0.3 जी. प्रतिशत (दानेदार चूर्ण) को प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में बिखेर दें और 5-6 दिनों तक खेत में पानी का स्तर 3-4 सेंटीमीटर बनाए रखें। 

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झुलसा रोग- अगर धान की फसल में झुलसा रोग के लक्षण दिखाई दें तो ट्राईसाइक्लोजोल 300 ग्राम प्रति हेक्टर की दर से छिड़काव करें। धान के खेत सुखा होने पर कटुवा इल्ली का प्रकोप हो सकता है। इसके नियंत्रण के लिए डाइक्लोरोवास 1 मिलीलीटर की दर से 500 लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति हेक्टर की दर से खेत में छिड़काव करें।

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