खेती बाड़ी
बंजर जमीन में उगाएं सोनामुखी

सोनामुखी एक झाड़ीनुमा औषधीय पौधा है, जो एक बार लगाने पर 4-5 साल तक उपज देता है। इसकी खेती बंजर जमीन पर बड़े ही आसानी के साथ की जा सकती है। इसके खेती में ज्यादा पानी और खाद की भी जरूरत नहीं होती है। इसकी फसल को न तो जानवर खाते हैं और न ही जल्द कीट लगते हैं। साथ ही दलहनी फसल होने की वजह से यह मिट्टी की उर्वक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है। इसकी पत्तियों और फलियों का इस्तेमाल औषधियां बनाने में किया जाता है।

मिट्टी इसकी खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी जिसकी पी.एच. मान 7-8.5 होती है, और जहां पानी निकलने की अच्छी व्यवस्था होती है, अच्छी मानी जाती है।
खेत की तैयारी
सोनामुखी की बुवाई करने से पहले खेत की कोई खास तैयारी करने की जरूरत नहीं पड़ती है। फिर भी अगर जुताई से पहले खेत की मिट्टी को पलटने वाले हल से पलटने के बाद हैरो या कल्टीवेटर चल दें और फिर पाटा लगा कर मिट्टी को समतल कर लें तो अच्छा रहता है।
बुवाई, बीज दर और तरीका
इसकी बुवाई जुलाई से सितंबर महीने में की जाती है। प्रति हेक्टेयर की दर से 10-12 किलो बीज का इस्तेमाल बुवाई के लिए किया जाता है। बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर रखी जाती है।
खाद
इसकी खेती के लिए ज्यादा खाद का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। फिर भी सड़े हुए 10-15 टन गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सिंचाई
बारिश के मौसम में इसकी सिंचाई करने की जरूरत नहीं होती है। सर्दियों में 30 दिन और गर्मी के मौसम में हर 15 दिन पर सिंचाई करने से फसल का विकास अच्छे से होता है। यहां आपको बता दे कि सिंचाई मिट्टी में नमी की मात्रा के आधार पर ही करनी चाहिए। ज्यादा सिंचाई करने या खेत में पानी जमा होना फसल के लिए अच्छा नहीं होता है।

निराई-गुड़ाई फसल की निराई-गुड़ाई जरूरत के मुताबिक एक निश्चित अंतराल पर करनी चाहिए।
कटाई
बुवाई के लगभग 100-120 दिनों के बाद इसकी पत्तियां काटने लायक हो जाती है। कटाई जमीन से करीब 3 इंच ऊपर से करनी चाहिए। पहली कटाई के बाद फसल दोबारा कटाई के लिए करीब 70-75 दिनों में तैयार हो जाती है।
उपज
कटाई के बाद करीब 400-600 किलो पत्तियां और 4 से 6 क्विंटल बीज मिल जाता है।
भंडारण
कटाई के बाद इसकी पत्तियों का रंग हरा रहना चाहिए। इसलिए कटाई के तुरंत बाद पत्तियों को छोटी-छोटी ढेर लगा कर रखा चाहिए। साथ ही इन्हें छांव में सुखाना चाहिए, जिससे पत्तियों का रंग हरा बना रहे।
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