कहानी सफलता की

फूलों से रची सफलता की कहानी

बिहार, सीतामढ़ी के शिवजी भंडारी ने अपना जीवन फूलों की खेती कर बदल लिया है। वो रीगा प्रखंड के भवदेपुर गोट गांव निवासी हैं, और उनके खेत में आज 15 लोग काम करते हैं। बीते दिनों को याद करते हुए शिवजी बताते हैं कि एक वक्त था जब वह शादी और अन्य कार्यक्रमों में फूलों की सजावट का काम करते थे। इसके लिए कोलकाता से फूल मंगवाते थे। लेकिन कड़ी मेहनत के बाद भी उनका परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था। फिर 2005 में उन्होंने फूलों की खेती करने का मन बनाया। 7वीं पास शिवजी ने बीज भंडार की दुकान से इस संबंध में जानकारी ली साथ ही कुछ किसानों से भी मिले। अपनी जमीन नहीं थी, तो 5-6 कट्ठा जमीन पट्टे पर लेकर खेती शुरू की। आज वो 7 बीघे जमीन पट्टे पर लेकर फूलों की खेती करते हैं। एक बीघा खेत में तकरीबन 50-60 क्विंटल फूल होते हैं, जिसकी लागत करीब 25-30 हजार आती है। आमदनी लागत से दोगुनी करीब 50 से 60 हजार रुपये होती है। शिवजी के इनके फूलों की मांग नेपाल तक है।

Image 2

इस तरह तैयार करते बीजे
शिवजी बताते हैं कि वह बीज को 2 तरह से तैयार करते हैं। एक जिस फूल का बीज तैयार करना होता है, उस पौधे से फूल नहीं तोड़ते। सूखने पर तोड़ कर बीज निकाला जाता है। इसके अलावा कलम विधि से भी पौध तैयार किए जाते हैं।

बीज के साथ मुफ्त में प्रशिक्षण
शिवजी से प्रेरणा लेकर करीब दो दर्जन किसान फूलों की खेती कर रहे हैं। शिवाजी इन किसानों को खेती के लिए न सिर्फ बीज और पौधे देते हैं बल्कि उसकी सही खेती के लिए मुफ्त में प्रशिक्षण भी देते हैं। शिवजी 1 साल में 3 बार फूलों की खेती करते हैं। गेंद की खेती हर सीजन में होती है। इसके अलावा चीना और चेरी के फूलों की खेती भी की जाती है। इनके पौधे अक्टूबर में लगाए जाते हैं। जनवरी से मार्च, अप्रैल तक फूल का उत्पादन होता है।

अगर आप शिवजी भंडारी से उनकी फूलों की खेती के संबंध में और जानकारी लेना चाहते हैं, तो आप शिवजी भंडारी को उनके मोबाइल नंबर 08271632551 पर संपर्क कर सकते हैं।

Leave a Comment