पंचायत
चम्हेड़ा में महिलाएं संभाल रहीं सफाई व्यवस्था

बिहार राज्य के बिहारशरीफ का एकंगरसराय प्रखंड का कोशियावां पंचायत देश के उन चुनिंदा पंचायतों में शामिल है, जहां शहरों जैसी सफाई व्यवस्था है। इस पंचायत के चम्हेड़ा गांव में कचरा प्रबंधन केंद्र बनाया गया है। साथ ही इस गांव की महिलाओं ने मिल कर गांव की सफाई की जिम्मेदारी ली है। इसी के तहत कुछ महिलाएं रोज सुबह ट्राइसाइकिल पर घर-घर जा कर कचरा जमा करने का काम करती हैं। घरों को उनका कचरा इकट्ठा करने के लिए लाल और हरे रंग के दो कूड़ेदान दिए गए हैं। लाल रंग के कूड़ेदान में अजैविक कचरा जैसे पॉलिथीन या घरों में इस्तेमाल होने वाली कोई ऐसी चीज जो प्रकृति के लिए हानीकारक है, और हरे रंग के कूड़ेदान में जैविक कचरा जैसे फल-सब्जियों के छिलके, खाना आदि यानी ऐसी चीजें जो प्रकृति के लिए हानीकारक नहीं हैं, जमा की जाती हैं। कचरा प्रबंध केंद्र में इन करचों की छंटाई का काम होता है जहां 12 महिलाएं काम करती हैं। ये महिलाएं इस कचरे से जैविक खाद, पर्स, पावदान, पेन स्टैंड, हाथ का पंखा आदि बनाती है।
2 वार्डों वाले चम्हेड़ा गांव में लगभग 3000 लोग रहते हैं। दोनों वार्डों में 1000 लीटर की क्षमता की टंकी वाले जलापूर्ति केंद्र भी बनाए गए हैं। इन्ही केंद्रों से गांव के लोगों को सुबह, दोपहर और शाम को पानी की सप्लाई की जाती है।
कैशलेस मुहिम से भी जुड़ा गांव
चम्हेड़ा के लोग केंद्र सरकार की कैशलेस मुहिम से भी जुड़ें हैं। मध्य बिहार ग्रामीण बैंक के सहयोग से गांव के दुकानदारों को पॉस मशीन यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन भी उपलब्ध कराई गई है जिससे दुकानदार ग्राहकों से ए.टी.एम. कार्ड के जरिए भुगतान ले सकें।
24 में 22 घंटे मिल रही बिजली
गांव के लोगों को करीब 24 घंटे बिजली भी मिल रही है। लोग घरों में रोशनी के लिए एल.ई.डी बल्बों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे उनका बिजली का बिल भी कम आ रहा है। प्रशान ने घरों में प्री-पेड मीटर की व्यवस्था भी कर रखी है। इसी वजह से जिला प्रशासन ने गांव को एनर्जी एफिशिएंट यानी ऊर्जा कौशल गांव घोषित कर दिया है।
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